उड़ान


उड़ती चिड़िया आसमान में हर कहि,
इनमे स्त्री-पुरुष का भेद नही।
जहाँ चाहती उड़ जाती, पुरे आसमान को नाप के आती,
पंख फैलाती झट से चहचहाती उड़ जाती, जैसे ख़ुशी में गाना गाती।

मानव की इनसे अलग है कहानी,
स्त्री की उड़ान लगती सब को बचकानी।
हर कोई इनको कैद करना चाहे,
हर कोई इनके पंख कुतरना चाहे।
बन जाए वो बस घर की रानी, भुल के अपने सपनो की कहानी।
हर पुरष की यही है चाहत सुहानी।

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